You ask your wife something and she says, *"wahan rakha hai.."*
This "wahan" can be either:
1. on the table
2. or any of the 26 drawers in kitchen
3. or even Antarctica..!!!
When wife say, *"woh laa do.."*..
It can be:
1. her Lipstick
2. or milk from market
3. or an AK 56..!!!
When wife says *"yeh kya hai..??"*
It can be:
1. your Pyjamas on the floor
2. Shoes lying around
3. or a Drone flying over Afghanistan.!!
When wife says, *"tumhe kabhi kuch samajh nahi aata.."*...It can be about
1. a new mushy WhatsApp msg
2. or Einstein's Theory of Relativity
3. or her latest spending spree in Mall...!
When wife says, *"abb bohot ho gaya..."* ...It can be
1. the mascara she is putting
2. or the amount of Anthrax that needs to be put in a Biological Weapon
3. or the latest spat she had...with your mother..!!!
And....when wife says, *"main kaisi lag rahi hoon?"*
Its GAME OVER.
It doesn't have any meaning...
except confirmed annihilation.
It just puts you in a fix which Arjun had faced.... just before the War started...... in Mahabharata ...as to whether you should follow *Dharma ....or Karma...!!!*
😂😁😀😂😀😂😁😀
DEDICATED TO MY MARRIED FRIENDS
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Friday, 4 August 2017
Tuesday, 1 August 2017
Super Market Ek Short Story
एक 20-22 साल का नौजवान सूपर मार्केट में दाखिल हुआ , कुछ खरीदारी कर ही रहा था कि उसे महसूस हुआ कि कोई औरत उसका पीछा कर रही है,मगर उसने अपना शक समझते हुए नज़रअंदाज़ किया और खरीदारी में मसरूफ हो गया,
लेकिन वह औरत मुस्ताकिल उसका पीछा कर रही थी, अबकी बार उस नौजवान से रहा न गया , वह अचानक उस औरत की तरफ मुड़ा और पूछा, मां जी खैरियत है ?
औरत बोली बेटा आपकी शक्ल मेरे मरहूम बेटे से बहुत ज्यादा मिलती जुलती है, मैं ना चाहते हुए भी आपको अपना बेटा समझते हुए आपके पीछे चल पड़ी, और आप ने मुझे मां जी कहा तो मेरे दिल के जज़्बात और खुशी बयां करने लायक नही, औरत ने यह कहा और उसकी आंखों से आंसू बहना शुरू हो गये।
नौजवान कहता है कोई बात नहीं मां जी आप मुझे अपना बेटा ही समझें।
वह औरत बोली कि बेटा क्या आप मुझे एक बार फिर मां जी कहोगे ?
नौजवान ने ऊंची आवाज़ से कहा, जी मां जी,
पर उस औरत ने ऐसा बर्ताव किया जैसे उसने सुना ही ना हो, नौजवान ने फिर ऊंची आवाज़ में कहा जी मां जी....
औरत ने सुना और नौजवान के दोनों हाथ पकड़ कर चूमे , अपने आंखों से लगाऐ और रोते हुए वहां से रुखसत हो गई।
नौजवान उस मंज़र को देख कर अपने आप पर काबू नहीं कर सका और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे, वह अपनी खरीदारी पूरी करे बगैर ही वापस चल दिया।
काउंटर पर पहुंचा तो कैशियर ने दस हज़ार का बिल थमा दिया...
नौजवान ने पूछा दस हज़ार कैसे ?.
कैशियर ने कहा आठ सौ का बिल आपका है और नौ हजार दो सौ का आपकी मां के हैं, जिन्हें आप अभी मां जी मां जी कह रहे थे।
वह दिन और आज का दिन
नौजवान अपनी असली मां को भी मौसी कहता है।
😀😁😂
लेकिन वह औरत मुस्ताकिल उसका पीछा कर रही थी, अबकी बार उस नौजवान से रहा न गया , वह अचानक उस औरत की तरफ मुड़ा और पूछा, मां जी खैरियत है ?
नौजवान कहता है कोई बात नहीं मां जी आप मुझे अपना बेटा ही समझें।
वह औरत बोली कि बेटा क्या आप मुझे एक बार फिर मां जी कहोगे ?
नौजवान ने ऊंची आवाज़ से कहा, जी मां जी,
पर उस औरत ने ऐसा बर्ताव किया जैसे उसने सुना ही ना हो, नौजवान ने फिर ऊंची आवाज़ में कहा जी मां जी....
औरत ने सुना और नौजवान के दोनों हाथ पकड़ कर चूमे , अपने आंखों से लगाऐ और रोते हुए वहां से रुखसत हो गई।
नौजवान उस मंज़र को देख कर अपने आप पर काबू नहीं कर सका और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे, वह अपनी खरीदारी पूरी करे बगैर ही वापस चल दिया।
काउंटर पर पहुंचा तो कैशियर ने दस हज़ार का बिल थमा दिया...
नौजवान ने पूछा दस हज़ार कैसे ?.
कैशियर ने कहा आठ सौ का बिल आपका है और नौ हजार दो सौ का आपकी मां के हैं, जिन्हें आप अभी मां जी मां जी कह रहे थे।
वह दिन और आज का दिन
नौजवान अपनी असली मां को भी मौसी कहता है।
😀😁😂
Sunday, 30 July 2017
दूसरीऔरत - एक कहानी
चाहे कुछ भी हो जाये बुआ,उस औरत को मैं कभी भी अपनी "माँ" स्वीकार नही करूँगी ,
४५ साल की कुँवारी औरत हम बच्चों को माँ का प्यार कैसे दे सकती है ?
वो बच्चों का दर्द क्या समझेगी , .!!
अरे हाँ मैं उसे क्यूँ कोस रही हूँ , मुझे तो शर्म आती है पापा की सोच पर हम बच्चों का देख भाल करने के आड़ में ,अपना सुख पूरा करना चाहते है। आपको ना जाने क्यूँ इतनी सी बात समझ नही आ रही है ।
शांति से सोच रिया तुम दोनों बहने तो शादी करके अपने घर चले जाओगी २-४ सालों में उसके बाद भैया अकेले रह जायेंगे ...कहते हुए कमला उसके सर को प्यार से सहलाने लगी ।तभी रिया बोली बुआ अगर माँ की जगह पापा को कुछ हो जाता तो भी आप यही बात इतनी आसानी से माँ के लिए कहती ,??
कमला बोली शायद नही कहती क्योंकि स्त्री अंदर से बहुत मजबूत होती है हर मुश्किल का सामना बड़ी साहस के साथ कर सकती है घर बाहर दोनो को संभाल सकती है , लेकिन पुरुष के लिए एकाकी जीवन बहुत मुश्किल होता है ।
ठीक है बुआ आपको पापा सही लगते है तो आप उनका साथ दे सकती हो ,पर हम दोनो बहने इस रिश्ते को कभी नही स्वीकारेंगे वो "दूसरी औरत" हमारी माँ कभी नही बन सकती कहते हुए रिया कमरे से बाहर चली गयी।
सुख के समय को बीतते कहाँ समय लगता है , देखते -देखते आठ साल हो गए ,दोनो बेटियों की शादी हो गयी दोनो ही अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गयी । पर शादी के बाद इतने सालों में दोनो ने कभी मायके का रुख नही किया । पापा को भी माफ नही कर पाई ...............
एक दिन दोपहर को रमाकांत जी घर का डोर बेल बजा दरवाज़ा रमाकांत जी की पत्नी ने खोला और सामने रिया को खड़े देखकर हैरान हो गयी जब तक कुछ समझ पाती ,रिया उनके पैरों में गिर कर रोने लगी मुझे माफ़ कर दो माँ मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई,
आप महान हो माँ मुझे माफ़ कर दो।
उठो बेटी कहकर उन्होंने रिया को गले से लगा लियाऔर उनके माथे को पागलो की तरह चूमने लगी .........
रमाकांत जी तंज कसते हुए बोले ये दूसरी औरत तुम्हारी माँ कब से हो गयी ?
रिया सिसकते हुए बोली आपको तो सब पता है पापा फिर आप ऐसा क्यूँ बोल रहे हो ...!
ओह, तो आज तुम्हे पता चल गया कि तुम्हारे पति को किडनी दान कर तुम्हारे सुहाग को जीवन दान देने वाला , अजनबी कोई और नही बल्कि ये दूसरी औरत ही है कहते हुए व्यंग्यात्मक मुस्कान रमाकांत जी के चेहरे पर फैल गई.... तुम जैसी कुछ लोगों की वज़ह से ही दुनिया कहती है कि ....."औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन है "
रमाकांत जी कुछ और बोलते उसके पहले ही उनकी पत्नी बोल उठी जाने भी दो रहने दो पुरानी बातें ........
जल्दी जाकर मिठाई लेकर आइये ना ......आज मैं पहली बार माँ बनी हूँ कहते कहते रो पड़ी ,.....
रमाकांत जी भी अपनी आँखों की नमी पोछते हुए थैला लेकर घर से बाहर निकल गए .......
४५ साल की कुँवारी औरत हम बच्चों को माँ का प्यार कैसे दे सकती है ?
वो बच्चों का दर्द क्या समझेगी , .!!
अरे हाँ मैं उसे क्यूँ कोस रही हूँ , मुझे तो शर्म आती है पापा की सोच पर हम बच्चों का देख भाल करने के आड़ में ,अपना सुख पूरा करना चाहते है। आपको ना जाने क्यूँ इतनी सी बात समझ नही आ रही है ।
शांति से सोच रिया तुम दोनों बहने तो शादी करके अपने घर चले जाओगी २-४ सालों में उसके बाद भैया अकेले रह जायेंगे ...कहते हुए कमला उसके सर को प्यार से सहलाने लगी ।तभी रिया बोली बुआ अगर माँ की जगह पापा को कुछ हो जाता तो भी आप यही बात इतनी आसानी से माँ के लिए कहती ,??
कमला बोली शायद नही कहती क्योंकि स्त्री अंदर से बहुत मजबूत होती है हर मुश्किल का सामना बड़ी साहस के साथ कर सकती है घर बाहर दोनो को संभाल सकती है , लेकिन पुरुष के लिए एकाकी जीवन बहुत मुश्किल होता है ।
ठीक है बुआ आपको पापा सही लगते है तो आप उनका साथ दे सकती हो ,पर हम दोनो बहने इस रिश्ते को कभी नही स्वीकारेंगे वो "दूसरी औरत" हमारी माँ कभी नही बन सकती कहते हुए रिया कमरे से बाहर चली गयी।
सुख के समय को बीतते कहाँ समय लगता है , देखते -देखते आठ साल हो गए ,दोनो बेटियों की शादी हो गयी दोनो ही अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गयी । पर शादी के बाद इतने सालों में दोनो ने कभी मायके का रुख नही किया । पापा को भी माफ नही कर पाई ...............
एक दिन दोपहर को रमाकांत जी घर का डोर बेल बजा दरवाज़ा रमाकांत जी की पत्नी ने खोला और सामने रिया को खड़े देखकर हैरान हो गयी जब तक कुछ समझ पाती ,रिया उनके पैरों में गिर कर रोने लगी मुझे माफ़ कर दो माँ मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई,
आप महान हो माँ मुझे माफ़ कर दो।
उठो बेटी कहकर उन्होंने रिया को गले से लगा लियाऔर उनके माथे को पागलो की तरह चूमने लगी .........
रमाकांत जी तंज कसते हुए बोले ये दूसरी औरत तुम्हारी माँ कब से हो गयी ?
रिया सिसकते हुए बोली आपको तो सब पता है पापा फिर आप ऐसा क्यूँ बोल रहे हो ...!
ओह, तो आज तुम्हे पता चल गया कि तुम्हारे पति को किडनी दान कर तुम्हारे सुहाग को जीवन दान देने वाला , अजनबी कोई और नही बल्कि ये दूसरी औरत ही है कहते हुए व्यंग्यात्मक मुस्कान रमाकांत जी के चेहरे पर फैल गई.... तुम जैसी कुछ लोगों की वज़ह से ही दुनिया कहती है कि ....."औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन है "
रमाकांत जी कुछ और बोलते उसके पहले ही उनकी पत्नी बोल उठी जाने भी दो रहने दो पुरानी बातें ........
जल्दी जाकर मिठाई लेकर आइये ना ......आज मैं पहली बार माँ बनी हूँ कहते कहते रो पड़ी ,.....
रमाकांत जी भी अपनी आँखों की नमी पोछते हुए थैला लेकर घर से बाहर निकल गए .......
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